Most popular trending quotes in Hindi, Gujarati , English

World's trending and most popular quotes by the most inspiring quote writers is here on BitesApp, you can become part of this millions of author community by writing your quotes here and reaching to the millions of the users across the world.

New bites

सच्चे रिश्ते खामोशियों से नहीं टूटते, बस कभी-कभी उन्हें सांस लेने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए होता है। और जब भरोसा बाकी हो, तो इंतज़ार बोझ नहीं, उम्मीद बन जाता है।

parmarsantok136152

Why Modern Marriage is a Challenge for Women's IndependenceDescription: Is marriage inherently unequal?

📖 In my book, Woman and Society, I dive deep into the Time Use Survey results and the "dual burden" that stresses modern women. Discover the 3 different models of marriage prevalent today. #WomenEmpowerment #ModernMarriage #BookRecomendations #GenderEquality

https://share.google/3MSM3bLcTDrQ6GLw6

komal14699gmail.com7374

विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏💐💐

पर्यावरण
----------------
हरा भरा सुंदर संसार
धरा की हरियाली का प्यार
नन्हे पौधे पेड़ बन कर
कर रहे धरा का श्रृंगार।

हवा भी हरियाली में मुस्कुराती है
पर्यावरण को शीतल कर जाती है
प्रदूषण रहित हवा अपना महत्व बता
सब को जीने का संदेश दे जाती है।

पर्यावरण को रखना होगा साफ
प्रकृति के साथ करना होगा इंसाफ
चलना होगा कदम से कदम मिलाकर हाथ
कुदरत ना हो फिर अपने खिलाफ।

पंछी पेड़ों पर चहचहाते हैं
हम सबके जीवन को सुंदर बनाते हैं
पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ
हमको यह सिखलाते हैं ।

आभा दवे
मुंबई

हाइकु -पर्यावरण पर
-----------
1)हरित धरा
चीख के कह रही
न काटो पेड़ ।

2)हरियाली है
जीवन की उमंग
पेड़ बचाओ ।

3)पवन चले
झूमते पेड़-पौधे
खुश होकर ।

4)पर्यावरण
हरित जीवन से
महके सदा ।

5)पर्यावरण
खूबसूरत बने
लगे निराला ।

6)प्रकृति हरी
सुंदर बनाना है
अप्रदुषित ।

7) पेड़ लगाना
अधिकार हमारा
नारा सबका ।

8)कारखाने से
धुएं का उत्सर्जन
बीमार दिल ।

9) ज्वलंत मुद्दा
परिवेश हो साफ
करो विचार ।

10)शिक्षा माध्यम
हटाओ प्रदूषण
जीवन खिले ।

11) प्लास्टिक थैली
घातक बनी अब
जान ले रही ।

12 )बहती नदी
गंदगी से दूषित
दुखी हो रही ।

13) महत्त्वपूर्ण
सफाई अभियान
जागे सब ही ।

14) समुद्र तट
निर्मल सदा रहे
ध्यान जरुरी ।

आभा दवे
मुंबई

daveabha6

एक वृक्ष के बीज को दफन किया,
उसने अंकुरित होकर जीवन दिया।

हवा, पानी और जमीन को शुद्ध किया,
प्रकृति के नवसर्जन में सामिल हुआ।

वह वृक्ष इतने से नहीं रुका,
अपनी शाखाएं पक्षियों के लिए दे दी।

तुम घोंसला बनाओं ओर अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाओ।
वह इंसानों की तरह ईर्षा भाव कहां रखते हैं?

कोई मुसाफ़िर आराम फरमाते हुए उन्हें देखता है तो उन्हें खुशी महसूस होती है,

क्योंकी किसी के हृदय को छांव से शांति जो मिलती है।

सुख जानें के बाद भी सूखी लकड़ी से किसी गरीब के चूल्हे पर भोजन पकाकर उसको अच्छा खाना मुहैया कराता है।
वृक्ष सही में एक एक अच्छा मित्र हैं।

parmarmayur6557

dil se likhi shayari...

neerbha

🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋
काबिल बनो और खरीद लो
अपनी पसन्दीदा चीज ।
ये कलयुग है जनाब,
यहा आंसुओ का कोई मोल नही।
🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋🌻🦋

jighnasasolanki210025

Do You Know that since you do not know who you really are, you believe yourself to be the name that you have been given. This has had a very powerful psychological effect on you. This effect is so deeply ingrained within you, that you believe that you are 'Chandulal [Your Name]'.

Read more on: https://dbf.adalaj.org/lWQ8i1H2

#spirituality #spiritualfacts #facts #doyouknow #DadaBhagwanFoundation

dadabhagwan1150

b

virdeepsinh

" જાગો, પ્રકૃતિ કરે પોકાર "

ધરતી લીલીછમ રાખવા, આજે સંકલ્પ એક કરીએ,
આવનારી પેઢીને કાજે, ચાલો પર્યાવરણને વરીએ.

કાપીને ઊંચા જંગલો, ઊભી કરી સિમેન્ટની દીવાલો,
પીંખાયા પક્ષીઓના માળા, હવે તો જરા સંભાળો!

પાણી નદીઓનાં કર્યા અશુદ્ધ ને વાતાવરણને પ્રદૂષિત,
પ્લાસ્ટિકનો વપરાશ તજી, સૃષ્ટિ કરો પાવન-સુશોભિત.

એક વૃક્ષ તમે વાવજો આજે, એક વૃક્ષ હું પણ વાવું,
જતન કરી એનું ધરતી માના શણગારને સુંદર બનાવું.

હજી સમય છે જાગવાનો, ના વહોરીએ કુદરતનો પ્રકોપ,
પર્યાવરણ બચાવી વ્યોમ", સૃષ્ટિને આપીયેં નવો ઓપ.

✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ"
જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

omjay818

नाचाचा....पदन्यास करता. करता..
माझं मनही तुझ्यासोबत ...नाचत असतं..ग..
....माझे हात तुझ्या कमरेभोवती...
..तुझे बाहु माझ्या गळ्यात...
..तुझी मान खाली..झुकलेली..
..माझी नजर तुझ्यात ..गुंतलेली...
माझे उष्ण ,..श्वास..तुझ्या चेहेर्यावर,,,
..तुझ्या आस्तित्वाचा..मंद ..गंध..माझ्या अवती भवती..
तुझी माझी पावलं..एकमेकांना..साथ देत असतात..!
..एका क्षणी..तु अलग होतेस माझ्यापासुन....
आणी ..नाचाचे नवे ..आवर्तन.सुरु.. होते..
..काही क्षण..होते चलबिचल माझी...
..मग परत एकत्र येवुन..थिरकतात..आपली पावले.!!
...खुपच रोमांचकारी..असतात ते..सारे क्षण..!!!
................................... वृषाली...

jayvrishaligmailcom

इश्क़ क्या किसी को जिंदगी देगा,,
ये तो शुरू ही किसी पे मरने से होता हे।❤️

nandiv

Good Morning 🌅

harshparmar8722

—हवाओ का रूख—
सभी दूर है मुझसे अभी
सभी पास होते तो क्या ?

जो दिल का हाल बताते उन्हे
तो तन्हाइयो का मलाल होता क्या ?

बुझी नहीं है चरागो की वो रोशनी
अभी थोड़ी कम है तो क्या ?

हवाओ का रूख बदलने तो दो
फिर सवेरा होने मे वक्त लगता है क्या ?

-MASHAALLHA

mashaallhakhan600196

let's enjoy

kattupayas.101947

Happy weekend quotes

kattupayas.101947

आशुतोष से रौद्र✨

तुम इतने ऊंचे हो कि मैं मौन हूँ,
उस ऊँचाई तक न पहुँचा, तो 'गौण' किया तुम्हें।

'गौण' स्वभाव नहीं तुम्हारा,
माया तुम्हारी है, और खेल भी तुम्हारा!

उपयोगी लगे तुम, तो घर ले आए,
नहीं लगे—तो विसर्जन के नाम पर फेंक आए।

तुम्हारी ही माया से, तुम्हारा मूल्य तय होता है;
नदी कब नाला बन गई, आराधना कब कर्मकांड,
और मूर्ति कब व्यापार बन गई?
मानव सभ्यता की विद्रूपताएँ ऐसे सामने आईं,
कि अब आना ही पड़ेगा तुमको!

आओ सुधार के लिए; रूप प्रलय का हो, तो भी ठीक है।
बजे डमरू, विध्वंस हो उस अहंकार का—
और उससे उपजे इस समस्त संसार का।

प्रलय अब नहीं, तो कब?
अहंकार अब बेहोशी की सीमा पार कर रहा है,
पंचभूतों पर भी अधिपत्य का प्रयास कर रहा है।

आओ महादेव! इनके कष्ट हरो,
तारो इन्हें और इस जग को भी।
तुम जिस भी रूप में आओगे, स्वीकार्य होगा हमें,
तुम जिस भी रूप में तारोगे, स्वीकार्य होगा हमें।

स्थिति वहीं है, जहाँ 'आशुतोष' की परिभाषा का अंतिम चरण—
और 'रौद्र' की परिभाषा का प्रारंभ है।

अब उठो समाधि से, अब विलंब ठीक नहीं;
बहुत सह लिया तुमने, और सहना अब ठीक नहीं।

मैं वरदान माँगता हूँ...
मैं विध्वंस माँगता हूँ!

~ कपिल तिवारी "यथार्थ"

kapiltiwari655298

असहज द्वंद्व✨

तुम्हें मैं क्या समझूँ?
तुम्हें समाज ने सताया या तुमने समाज को?
मैं डर जाता हूँ, जब तुम मुझे देखते हो।
तुमने अपने चरित्र को ऐसा विचित्र बनाया,
जिससे केवल विचलितता जन्म लेती है।


तुम्हारे अजीब वस्त्र, गले में अनेकों मालाएं,
शरीर पर राख, सिर पर टोपी और चश्मा,
गले में लटकती सीटी—जब तुम चलते हो,
तो सच यह है कि 'स्वस्थ मनुष्य' की परिभाषा,
तुमसे कहीं मेल नहीं खाती।


तुम कहीं भी मल त्याग करते हो, कहीं भी गंदगी,
कहीं भी सो जाते हो; स्वच्छता से तुम दूर भागते हो।
गालियाँ तुम्हारे मुख से धारा-प्रवाह फूटती हैं—
कभी भी, किसी के लिए भी!
तुम्हारी प्रजाति कम नहीं है, समय के साथ बढ़े हो तुम भी।


कभी खुद को 'बाबा' कहते हो, कभी 'पागल',
कभी कहते हो—"मैं दुनिया से परे हूँ,"
पर कभी शराब, तो कभी नाली में पड़े हो!


तुम्हारे विचित्र चरित्र से जन्मी क्रियाएँ,
मुझे गहरे तक असहज कर देती हैं।
मैं स्वयं से प्रश्न करता हूँ कि—
इस असहजता का जिम्मेदार आखिर कौन है?
समाज, तुम, या मैं खुद?


जो भी हो, मैं तुमसे सहजता की दोस्ती नहीं कर पाता।
तुम मुझे ऐसे मत देखो... मैं जा रहा हूँ;
तुम्हें तुम्हारी ही स्थिति में छोड़कर।


मैं कामना कर सकता हूँ—तुम्हारे स्वस्थ होने की,
या...
स्वयं को तुम्हें समझने के लायक बनाने की।
तुम स्वस्थ रहो!
अलविदा।

~ कपिल तिवारी "यथार्थ"

kapiltiwari655298

To some people,bonding means a relationship.To me,it means holding a hand.
Miss you my double kick...ilysm....miss you

itzmeakki

Hammer Examiners - Poem
A Glimpse of the Sorry State of Affairs Prevailing in the Field of Research .... by Vanita Thakkar ….

https://vanitathakkar.blogspot.com/2026/03/hammer-examiners-poem.html

vanitathakkar

जागते आंखें थक गई
गीत या कविता


जागते जागते आंखें थक गई
अब जागे रहना मुश्किल है

मुश्किल है
आंखें खोल कर दुनिया की रंगटे देखना

देखना दुनिया की तोर तरीके
और खुद को भूल जाना
डर लगता है खुद को खोने से


डर लगता है हां खुद को खोने से
खुद को खोने से

खुद को खोकर किसी और की होने से


अब जागना मुश्किल है
मुझे सोने दो
सपनों में ही हमसफर जहां मुझे खुद के होने दो



मुझे जागना नहीं सोना है
रोते-रोते पलके मोटी हो गई है
मुझे अब हंसना है


यह प्रकृति का नियम है
जिंदगी है या मौत सब के हिस्से आना है


फिर इस बात से क्यों डरना है
यह प्रकृति का नियती है
किसी को ज्यादा गम किसी को काम गम मिलना है


इस से क्या डरना है
मैं प्रकृति का एक कन हुं
ब्रह्मांड का एक कटरा
फिर हमें इन्हीं में मिल जाना है


मुझे अब नहीं जागते रहना मुझे अब सोना है

जो होगा कल देखा जाएगा
आज मुझे आराम करना है



डर मुझे कल की निश्चित से नहीं है
डर है मुझे खुद को खो देने से

डर मुझे अंत से नहीं है
डर है मुझे खुद से दूर हो जाने से


खुद की करीब हर पल रहना चाहती हूं
जागते और सोने के बाद भी


जागते हुए
कठोर लग रहा है दुनिया
और इस दुनिया मैं आते हुए मैं खुद को खो देता हूं
मुझे ऐसा लग रहा है



हां मुझे ऐसा लगता है
यह दुनिया मेरा अपना कहां लगता है


मुझे जागना नहीं सोना है
कुछ देर ही सही खुद का होना है

आराम है वहां जहां मैं खुद की ही हूं
दर्द है जहां मैं जहां मैं खुद की नहीं हूं



यह मेरा होना खुद का थोड़ी खुदगर्जी है
पर यही मुझको राहत देती
मेरी इसमें मर्जी है



मेरा होना खुद का थोरी खुदगर्जी है
और मुझे यही राहत देती
मेरी इसमें मर्जी है


हां खुदगर्जी है
पर यह मेरी मर्जी है



जागते जागते थक गई
अब आंखें बंद करना दर्द मन की जरूरत है

abhinisha

Good evening friends.. have a nice time

kattupayas.101947