क्या खबर किस और जाना है, बस अपनी ही पहचान को खोते जाना है।
किस मोड़ पर मुडना हे ये नहीं जानते फिर भी आज बस मुझे चलते जाना है।
क्यू फिक्र हे सब को कल की,हमे बस तो हमारे आज को बेहतर बनाते जाना है।
क्यू घिरे रहते हे लोग परेशानियों में,हमे तो बस अपनी ही फ़क़ीरी में जीते चले जाना है।
क्रमशः