मुलाकात का वह दौर शायद कभी वापस नहीं आता ,जो रिश्तों की शुरुवाती चरण में होता है।
अजीब सी बेचैनी,जानने की जिज्ञासा और किये जाने वाले एक सवाल का उत्तर मिलने का इंतजार।
यह वह पल है,जो व्यक्त नहीं होते सिर्फ अनुभव किए जाते है।
निर्माण हुए रिश्ते को ,
निभाना भी उस व्यक्ति के प्रति सम्मान दर्शाता है,बजाय उसे टालना।