कभी लगता है,
कोई बस गले लगा ले,
और मैं रो लूँ…
ज़ोर-ज़ोर से,
बिना कुछ कहे,
बिना कुछ समझाए
थक गई हूँ
अपने अंदर के शोर से,
हर रोज़ खुद को संभालते-संभालते,
मुस्कुराते-मुस्कुराते,
और अपनी ही खामोशी से लड़ते-लड़ते।
कभी कोई बस इतना कह दे—
“आज मत संभलो,
बस रो लो…”
तो शायद ये दिल
थोड़ा हल्का हो जाए,
और आँखों में ठहरे आँसू
आख़िरकार बह जाएँ।
कभी-कभी
खुद को भूलकर
सुकून से रो सके।
❤️sarwat fatmi❤️