सालों बाद जब उस स्त्री ने उस पुरुष की पुरानी डायरी खोली, तो हर पन्ने पर सिर्फ़ तारीख़ बदली थी, अल्फ़ाज़ वही थे; ‘आज भी तुम्हारी याद आई.’ आख़िरी पन्ने पर एक सूखा हुआ गुलाब का पत्ता रखा था और नीचे लिखा था. ‘अगर दूरी ही हमारा मुक़द्दर है, तो मुझे इस मुक़द्दर से भी इश्क़ है’...🤍:)