यदि पानी खराब हो तो, उसे पिया नहीं जाता,
किंतु अगर , कहीं अग्नि प्रज्वालित हो जाए,
सब कुछ भस्म करने लगे, तो यही पानी
उस अग्नि को बुझा भी सकता है!
सारा खेल" दृष्टिकोंन" का हैं, इस "सोच" का !
आपकी "सोच" अगर उत्तम होंगी ,
तो वही उत्तम "सच "बनकर सामने आयेगी,
इस संसार में "वस्तु "हो या "व्यक्ति" हो
उनमें "कमिया" ढूँढने बंद कर दीजिये
और उसका उपयोग क्या हैं ये ,
ढूँढना प्रारंभ कर दीजिये
"जीवन "सरल हो जायेगा!!!!!