मैं और मेरे अह्सास
मुझे याद कीजिए
मुझे याद कीजिए जब हौसला कम होने लगे l
मुझे याद कीजिए जब तौफ़ीक़ खोने लगे ll
रास्ता मंज़िल तक जाने का जरूर दिखाएंगे l
मुझे याद कीजिए जब अरमान सोने लगे ll
बोझ बन गई हो जिन्दगी की सुबह शाम तब l
मुझे याद कीजिए जब अपनेआप ढ़ोने लगे ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह