मैं और मेरे अह्सास
अभी कल की बात है
जीवन की शुरुआत की, अभी कल की बात हैं l
हौसला इस लिए है कि हमराही का साथ हैं ll
आज नाचने, झूमने गाने का मन करता है l
खूबसूरत सी नशीली मुलाकात की रात हैं ll
सँभालकर और इत्मीनान के साथ जीना l
अनमोल जिन्दगी ईस्वर की सौगात हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह