आज जब मैंने 15 अगस्त के मौके पर अपनी कविता सुनाई, तो जिस तरह से आप सभी ने मेरी कविता की तारीफ़ की, उससे दिल बहुत खुश हुआ। मैंने सिर्फ़ कविता सुनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने शब्दों के ज़रिए देशभक्ति की भावनाओं को आप तक पहुँचाने की कोशिश की। आप सभी ने मेरी आवाज़, भाव और शब्दों को पसंद किया, इसके लिए दिल से शुक्रिया। सच कहूँ तो आज ऐसा लगा कि मैंने कविता सुनाई नहीं, बल्कि आप सभी को उसे महसूस करा दिया। आप सभी का प्यार और सम्मान मेरे लिए बहुत मायने रखता है।