🇮🇳 माँ भारती — तेरे चरणों में मेरा प्रणाम 🇮🇳
हे माँ भारती,
तेरे चरणों में मेरा शत-शत प्रणाम,
तेरी मिट्टी की खुशबू में बसा है
मेरे जीवन का हर एक नाम।
तेरी गोद में जन्म लिया,
तेरी हवाओं में साँसें पाईं,
तेरे आकाश को देखकर
हमने सपनों की उड़ानें पाईं।
तू केवल एक भूमि नहीं,
तू करोड़ों दिलों की पहचान है,
तेरे कण-कण में इतिहास बसा,
तेरे कण-कण में हिंदुस्तान है।
कहीं हिमालय तेरी शान बने,
कहीं गंगा तेरी धारा है,
कहीं खेतों में लहराता अन्न,
कहीं समुद्र तेरा किनारा है।
कहीं मंदिर की घंटी बजती,
कहीं मस्जिद से आती अज़ान,
कहीं गुरुद्वारे की वाणी गूँजे,
कहीं चर्च में होती प्रार्थना महान।
अलग-अलग हैं हमारी भाषाएँ,
अलग-अलग हैं पहनावे,
पर जब बात तेरी आती है माँ,
एक हो जाते हैं सारे भाव हमारे।
कश्मीर की ठंडी वादियों से
कन्याकुमारी के सागर तक,
तेरी धरती हमें जोड़ती है
हर रिश्ते के सच्चे आधार तक।
राजस्थान की तपती रेत में
तेरी वीरता की कहानी है,
पूर्वोत्तर की हरियाली में
तेरी प्रकृति की निशानी है।
ओडिशा की पावन धरती पर
जगन्नाथ का आशीर्वाद है,
महाराष्ट्र की वीर भूमि में
शौर्य और स्वाभिमान आबाद है।
बंगाल की माटी में क्रांति है,
पंजाब की धरती में जोश,
दक्षिण की संस्कृति में गहराई,
हर प्रदेश में अपना होश।
तूने हमें अनेक बनाया,
पर कभी अलग नहीं किया,
भाषा, वेश और संस्कृति देकर
एकता का दीप जलाया।
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तेरे वीरों को नमन
हे माँ,
जब तेरी धरती पर संकट आया,
किसी ने अपने प्राणों की चिंता नहीं की।
किसी ने हँसकर फाँसी स्वीकार की,
किसी ने जेल की दीवारें देखीं,
किसी ने जंगलों में संघर्ष किया,
किसी ने गोलियों के सामने
अपना सीना रख दिया।
उन वीरों को मेरा प्रणाम,
जिन्होंने अपना आज दिया
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ
अपना कल जी सकें।
उन माताओं को मेरा प्रणाम,
जिन्होंने अपने लाल को विदा करते हुए
आँखों के आँसू छिपा लिए,
और कहा—
“जा बेटा, देश पहले है।”
उन बहनों को प्रणाम
जिन्होंने राखी की डोर में
भाई की कलाई ही नहीं,
भारत की रक्षा का विश्वास बाँधा।
उन पत्नियों को प्रणाम
जिन्होंने सिंदूर की कीमत समझते हुए भी
देश के नाम पर
अपने जीवन का सबसे बड़ा दर्द सहा।
और उन बच्चों को प्रणाम
जिन्होंने बचपन में ही
“पिता कब लौटेंगे?”
का अर्थ समझ लिया।
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माँ, तेरी मिट्टी महान है
तेरी मिट्टी से बना किसान
जब खेत में बीज डालता है,
तो केवल अन्न नहीं उगाता—
वह करोड़ों जीवन बचाता है।
उसके माथे का पसीना
तेरे माथे का सिंदूर है।
उसके हाथों की मेहनत
तेरी शक्ति का प्रमाण है।
किसान जब सूखे से लड़ता है,
बाढ़ से लड़ता है,
धूप से लड़ता है,
ठंड से लड़ता है—
तब भारत माता
उसके साथ खड़ी होती है।
और जब वही किसान
अपनी फसल लेकर घर लौटता है,
तो उसके आँगन में
पूरे देश की उम्मीद लौटती है।
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माँ, तेरी बेटियाँ भी तेरी शक्ति हैं
जिस बेटी को कभी
कमज़ोर समझा गया,
आज वही बेटी
आसमान छू रही है।
वह सैनिक बनकर सीमा पर खड़ी है,
वैज्ञानिक बनकर प्रयोगशाला में है,
शिक्षिका बनकर भविष्य बना रही है,
डॉक्टर बनकर जीवन बचा रही है,
खिलाड़ी बनकर तिरंगा ऊँचा कर रही है।
वह गाँव की मिट्टी में भी है,
शहर की ऊँची इमारतों में भी।
वह चूल्हे की आग में भी है,
और अंतरिक्ष की उड़ान में भी।
माँ भारती की बेटी
अब किसी सीमा में कैद नहीं।
उसकी आँखों में सपना है,
उसके कदमों में आत्मविश्वास है,
और उसके हृदय में—
भारत का सम्मान है।
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माँ, तेरे बेटे भी तेरा गौरव हैं
कोई सीमा पर खड़ा है,
कोई खेत में पसीना बहा रहा है।
कोई सड़क बना रहा है,
कोई विद्यालय में ज्ञान बाँट रहा है।
कोई मशीन बना रहा है,
कोई नई खोज कर रहा है।
कोई गरीब के घर तक
उम्मीद पहुँचा रहा है।
कोई अस्पताल में
किसी अनजान की जान बचा रहा है।
देश केवल संसद से नहीं बनता।
देश बनता है—
एक ईमानदार शिक्षक से,
एक मेहनती मजदूर से,
एक जिम्मेदार नागरिक से,
एक समर्पित सैनिक से,
एक सच्चे किसान से,
एक साहसी बेटी से,
और उस हर इंसान से
जो अपने हिस्से का काम
ईमानदारी से करता है।
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माँ भारती, हमें एकता देना
हे माँ,
हमारी भाषा अलग हो सकती है,
हमारी पूजा की विधि अलग हो सकती है,
हमारे त्योहार अलग हो सकते हैं,
हमारे कपड़े अलग हो सकते हैं—
पर हमारे दिल में
तेरे लिए सम्मान एक रहे।
हमारे विचार अलग हों,
पर एक-दूसरे के प्रति सम्मान बना रहे।
हम असहमत हों,
पर एक-दूसरे से नफरत न करें।
हमारी पहचान अनेक हों,
पर हमारी मातृभूमि एक रहे।
क्योंकि—
विविधता हमारी सुंदरता है,
और एकता हमारी शक्ति।
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माँ, हमें केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी याद रहे
हम तुझसे बहुत कुछ माँगते हैं—
अच्छी सड़कें,
अच्छे विद्यालय,
रोजगार,
सुरक्षा,
स्वास्थ्य,
विकास।
लेकिन माँ,
हमें यह भी याद रखना होगा—
हमारा कर्तव्य क्या है?
सड़क साफ रखना भी देशभक्ति है।
ईमानदारी से काम करना भी देशभक्ति है।
किसी कमजोर की मदद करना भी देशभक्ति है।
बेटी का सम्मान करना भी देशभक्ति है।
प्रकृति की रक्षा करना भी देशभक्ति है।
किसी भूखे को भोजन देना भी देशभक्ति है।
कर चोरी न करना भी देशभक्ति है।
किसी के अधिकार न छीनना भी देशभक्ति है।
और जब देश हमसे
ईमानदारी माँगे—
तब अपने स्वार्थ से ऊपर
राष्ट्रहित को रखना भी देशभक्ति है।
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माँ, हमें ऐसा भारत बनाना है
जहाँ किसी बच्चे की शिक्षा
गरीबी के कारण न रुके।
जहाँ किसी बेटी को
अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।
जहाँ किसान
अपनी मेहनत का सम्मान पाए।
जहाँ मजदूर
अपने श्रम पर गर्व कर सके।
जहाँ युवा
रोजगार के लिए निराश न हो।
जहाँ बुजुर्ग
अकेलेपन में न जीएँ।
जहाँ किसी गरीब को
इंसान होने के कारण छोटा न समझा जाए।
जहाँ धर्म इंसान को बाँटे नहीं,
बल्कि इंसानियत जोड़ती रहे।
जहाँ विज्ञान आगे बढ़े,
पर संस्कार पीछे न छूटें।
जहाँ विकास हो,
पर प्रकृति भी सुरक्षित रहे।
जहाँ ऊँची इमारतों के साथ
ऊँचे विचार भी हों।
जहाँ भारत केवल
एक विकसित राष्ट्र न बने—
बल्कि एक ऐसा राष्ट्र बने
जिसे देखकर दुनिया कहे—
“यह देश केवल शक्तिशाली नहीं,
मानवीय भी है।”
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मेरी माँ, मेरा भारत
माँ भारती,
मैं तुझसे सोना नहीं माँगती,
मैं तुझसे धन नहीं माँगती।
मैं बस इतना माँगती हूँ—
मेरे देश के बच्चों की आँखों में
सपने जीवित रहें।
मेरे युवाओं के हाथों में
काम रहे।
मेरे किसानों के खेतों में
हरियाली रहे।
मेरी बेटियों के कदमों में
आज़ादी रहे।
मेरे सैनिकों के परिवारों में
सम्मान रहे।
मेरे बुजुर्गों के चेहरे पर
सुकून रहे।
और मेरे देश के हर नागरिक के दिल में
एक-दूसरे के लिए
इंसानियत रहे।
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अंतिम प्रण
आज तेरी मिट्टी को माथे से लगाकर
मैं एक प्रण करती हूँ—
मैं अपने देश से केवल प्रेम नहीं करूँगी,
बल्कि उसके प्रति अपना कर्तव्य भी निभाऊँगी।
मैं नफरत से नहीं,
समझ से आगे बढ़ूँगी।
मैं किसी को छोटा नहीं समझूँगी।
मैं प्रकृति की रक्षा करूँगी।
मैं बेटियों का सम्मान करूँगी।
मैं मेहनत का सम्मान करूँगी।
मैं अपने अधिकारों के साथ
अपने कर्तव्यों को भी याद रखूँगी।
और जब कभी मेरे सामने
स्वार्थ और राष्ट्रहित के बीच चुनाव होगा—
तो माँ,
मेरे भीतर इतनी शक्ति देना
कि मैं सही रास्ता चुन सकूँ।
क्योंकि तू केवल
मेरी जन्मभूमि नहीं।
तू मेरी पहचान है।
तू मेरी भाषा की आवाज़ है।
तू मेरे सपनों की धरती है।
तू मेरे पूर्वजों की विरासत है।
तू आने वाली पीढ़ियों की आशा है।
और जब तक मेरे हृदय में
एक भी धड़कन बाकी है—
तेरे लिए मेरा सम्मान
कभी कम नहीं होगा।
हे माँ भारती,
तेरे चरणों में मेरा शत-शत प्रणाम।
तेरी मिट्टी को नमन,
तेरे वीरों को नमन,
तेरे किसानों को नमन,
तेरी बेटियों को नमन,
तेरे युवाओं को नमन,
और तेरे हर उस नागरिक को नमन
जो भारत को बेहतर बनाने के लिए
अपने हिस्से का दीप जलाता है।
🇮🇳 मेरा भारत, मेरी माँ।
🇮🇳 मेरी मिट्टी, मेरा अभिमान।
🇮🇳 मेरा तिरंगा, मेरी शान।
जय हिंद। 🇮🇳
वंदे मातरम्।