मैं और मेरे अह्सास
सावन के गीत
रिमझिम-रिमझिम बूंदों ने मिलकर सावन के गीत सुनाएँ ।
क़ायनात में सभी बारिस प्रेमियो ने मधुर
प्यारे गाएँ ll
भीगी मिट्टी, हरियाली ओ सजा हुआ
वातावरण l
हवाओ की सरगम पंछियों की चहचहाहट
संदेशा लाएँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह