बरसात के बूद को लेकर। लंबी दूरी तय करके। बूंद को ले आती है। वजन की परवाह न किए बिना। अपनी नरम पीठ पर रख। आसानी से ले आती है। जवानी की जोश दिखाकर। लोगों को वस में कर देती है। अपना गहरा काला रंग दिखा कर। लोगों को डराती है। धरती को गिला कर। हरियाली फैलाता है। आसमान को छुपा कर। अपना करतब दिकाती है। अपना उम्र घटाकर। हमारा जीवन बढ़ती है। बिजली ऐसी कड़कती है। जैसे कोई योद्धा चीला रहा हो। बिजली ऐसी चमकती है। जैसे कोई शक्ति हो।