The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
"अंधेरा कभी डरावना नहीं होता, अंधरे में जो सोचा जाता है वह डरावना होता है।" GM Dharmendra Kumar
"तुम्हारे बिना जीना नहीं, तुम्हारे भीतर जीना सीख रहा हूं।" Very good morning Dharmendra Kumar
"मोक्ष क्या है? तुम्हारे साथ होते हुए भी तुमसे कुछ न चाहना।" G.N. Dharmendra Kumar
"तुम्हें खोने का डर नहीं है, डर है कि तुम्हें महसूस करना कहीं भूल न जाऊँ।" good morning Dharmendra Kumar
"अंत में क्या बचेगा?! न तुम!, न मैं!, बस हमारे बीच जो प्रेम था, वही बचेगा।" GOOD MORNING Dharmendra Kumar
"तुम मेरी कहानी नहीं हो, तुम वह मौन हो जिसके बाद सारी कहानियाँ खत्म हो जाती हैं।" Dharmendra Kumar --सुप्रभात
नमस्कार लेखक मित्रों एवं श्रोता दोस्तों! मातृभारती के इस प्लेटफॉर्म पर आपका स्वागत है, मैं, हूं आपका दोस्त... धर्मेंद्र कुमार पटेल। घुमक्कड़ जिज्ञासा मेरी पुस्तक के रिव्यू के लिए आपके समक्ष रख रहा आपके बहुमूल्य सुझाव और आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ। यह किताब यात्रा के दौरान मिली सीख पर पूरी तरह आधारित नॉन फ़िक्शनल किताब है। जिसमें मेरे ज़ज़्बात ने इस धरती के उन सभी विकसित देशों जो आज विश्व के पटल पर एक अनोखी छाप छोड़ रहें हैं, उनसे प्रेरित थी, और ठीक वैसे ही जज़्बात और छाप मुझे अपने देश में भी देखने को मिली, जबकि ऐसा लगता है कि शायद हम जापान या स्वीडिश देशों जैसी संस्कृति या स्वभाव नहीं विकसित कर सकते! लेकिन नॉर्थईस्ट के राज्यों की यात्रा के दौरान मेरी वो सोच टूट गई। ............................................................................ *पुस्तक के कुछ अंश निम्नवत् हैं* ............................................................................ "हर किताब एक सवाल से शुरू होती है। यह किताब भी। फ़र्क बस इतना है कि यह सवाल आपसे पूछा जा रहा है- क्या आप सच में वही जिंदगी जी रहे हैं, जो आप जीना चाहते थे? घुमक्कड़ जिज्ञासा कोई यात्रा मार्गदर्शिका नहीं है। इसमें ना तो सस्ते होटल बताये गये हैं, और ना ही कोई परफेक्ट इटिनरी। यह किताब उन पलों के बारे में है, जब मन रोजमर्रा की जिंदगी से थोडा आगे देखना चाहता है।जब भीतर कहीं से आवाज आती है- चलो, कुछ अलग देखते हैं। हम सबके भीतर एक घुमक्कड़ रहता है। बचपन में यह ज्यादा बोलता है- नये रास्ते, नई जगहें, नये लोग। फिर धीरे-धीरे जिम्मेदारियां उसे शान्त रहना सिखा देती हैं। यह किताब उसी घुमक्कड़ को फिर से जगा देने की कोशिश है- बिना किसी जोर के, बिना किसी उपदेश के। इस किताब के अध्याय किसी क्रमबद्ध यात्रा की तरह नहीं हैं. ये वैसे ही हैं जैसे जिंदगी चलती है- कभी तेज, कभी धीमी, कभी स्पष्ट, और कभी उलझी हुई। आप चाहें तो इसे शुरुआत से अन्त तक पढ़ें, या किसी भी अध्याय से शुरू करें। सफर हर बार नया ही लगेगा। अगर आप यह किताब इसलिये उठा रहे हैं क्योंकि कहीं जाना चाहते हैं- तो आप सही जगह पर हैं। और अगर इसलिए उठा रहें हैं क्योंकि कहीं से लौट आयें हैं- तो भी। क्योंकि सफर केवल निकलने का नाम नहीं, लौटकर बदल जाने का नाम भी है। इस किताब को पढ़ते समय कोई जल्दबाजी न करें। इसे उसी रफ्तार से पढिय़े जिस रफ्तार से आप अपनी चाय पीते हैं या खिड़की से बाहर देखते हैं। कुछ पंक्तियाँ आपको आगे बढा़एंगी, कुछ आपको रोकेंगी। दोनों ही ठीक हैं। और अगर अन्त तक पहुँचते-पहुँचते आपके भीतर सवाल थोडे बढ़ जायें, जवाब थोडे शान्त हो जाएं, और दुनिया थोड़ी सी बड़ी लगने लगे- तो समझिए यह किताब अपना काम कर चुकी है। तो, आइये पन्ना पलटिए, सफर आपका इंतजार नहीं कर रहा- लेकिन वह हमेशा आपके लिये तैयार है। समर्पण: उन सभी के लिये- जो सवाल पूछने से नहीं डरते, जो रास्ते में सीखने को तैयार रहते हैं, और जो मानते हैं कि दुनियां देखने से सोच बड़ी होती है।
************************************************ "अंत में कुछ नहीं बचेगा, सिवाय उन कहानियों के जिन्हें तुमने जिया है।" Very Good Morning
"दुनिया गोल है, इसलिए जो भागते हैं वो लौट कर वहीं आ जाते हैं जहाँ से डर कर भागे थे।" शुभ रात्रि
आज ऐप में प्रॉब्लम आ रही है क्या,बार-बार not found का मैसेज आ रहा है। Good afternoon all of you.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser