The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
Continue log in with
By clicking Log In, you agree to Matrubharti "Terms of Use" and "Privacy Policy"
Verification
Download App
Get a link to download app
ज़िंदगी को किताब समझा है, हर पन्ने को पढ़ के बैठे हैं। कुछ पन्ने फटे हुए हैं, फटे पन्नों को भी जोड़ के बैठे हैं। खुशी कभी आई, कभी गई, ग़म को ही स्थाई बना के बैठे हैं। लोग मिले, मतलब से मिले, हम तो बेमतलब ही निभा के बैठे हैं। *सुनो, मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ,* दिल में आज भी वही मासूमियत है, मासूमियत को ही बचा के बैठे हैं। दुनिया चालाक है, हम सादे हैं, सादगी को ही सजा के बैठे हैं। ज़िंदगी से अब कोई डर नहीं, ज़िंदगी को ही दाँव पे लगा के बैठे हैं। - Dharmendra Kumar
"हर तरफ़ आवाज़ें थीं, बातें हज़ार थीं, मगर दिल की सुनने वाली नज़रें कहाँ थीं? हम अपने ही सवालों में उलझे रहे, दूसरों की ख़ुशी में ख़ुद को ढूँढ़ते रहे..." - Dharmendra Kumar
"शाम से सुबह मिला के बैठे हैं, ख्वाबों से दिल खिला के बैठे हैं। थोड़ी सी रोशनी बची है अभी, उसी से घर सजा के बैठे हैं। हर मोड़ को अपना बना के बैठे हैं, हर दर्द को गले लगा के बैठे हैं। सफर लंबा है अभी तो, सुनो, मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ..." - Dharmendra Kumar
"पुरुष को जीतना नहीं आता, उसे हार कर भी मुस्कुराना आता है, वो घर बनाता है, पर घर में खुद के लिए एक कोना भी नहीं पाता है, वो सबका सहारा बनता है, पर उसका सहारा कोई नहीं बनता..." - Dharmendra Kumar
अब हर बात पर शिकायत नहीं करते, बीते कल से रोज़ बग़ावत नहीं करते। जो मिला, उसे जीवन का हिस्सा माना, जो छूटा, उसे लौटाने की ज़िद नहीं करते। - Dharmendra Kumar
ज़िंदगी में सबसे भारी चीज़ अफसोस है, जो बीते हुए कल को आज पर लादे बैठा है। - Dharmendra Kumar
जिंदगी में सबसे बड़ा बोझ दूसरों से की गई उम्मीदें हैं, जिन्हें हम खुद ही अपने कंधों पर लादे बैठे हैं। - Dharmendra Kumar
मेरी कलम में मेरे एहसास रहते हैं, हर शब्द में कुछ अनकहे राज़ रहते हैं। जो बातें किसी से कह नहीं पाया, "वही पन्नों पर मेरे अल्फ़ाज़ रहते हैं। कभी कलम ने मेरा दर्द लिखा, कभी उम्मीदों का नया पर्व लिखा। कभी बिछड़े रिश्तों की कहानी लिखी, कभी ख़ुद से मिलने की निशानी लिखी। लिखना मेरे लिए सिर्फ़ शौक़ नहीं, यह दिल से दिल तक जाने का रास्ता सही। जब शब्दों में एहसास उतर आते हैं, कई अनजान दिल भी क़रीब आ जाते हैं। मैं अपनी कलम को सच्चा रखूँगा, हर अनुभव को ईमानदारी से लिखूँगा। मेरी रचना में मेरा वजूद रहे, हर पंक्ति में इंसानियत का एहसास रहे।"
दिल में एक एहसास लिए बैठे हैं, हम ख़ामोशियों में आवाज़ लिए बैठे हैं। भीड़ तो साथ है पर तन्हा हैं हम, हर महफ़िल में खुद को तलाश लिए बैठे हैं। वक्त ने तो बहुत कुछ छीना है हमसे, फिर भी कुछ ख्वाब बाक़ी लिए बैठे हैं। फ़क़त इतना सुन लो, हम अभी बाक़ी हैं। -Dharmendra Kumar
"86 अरब न्यूरॉन लिए बैठे हैं, हम दिमाग में ब्रह्मांड लिए बैठे हैं। 20 वॉट में पूरी दुनिया सोचते हैं, फिर भी खुद को नादान किए बैठे हैं। डोपामीन के पीछे भागते हैं सब, हम तो सुकून को अनजान किए बैठे हैं। यादें तो बस केमिकल हैं, फिर भी यादों को भगवान किए बैठे हैं। फ़क़त इतना सुन लो, हम अभी बाक़ी हैं।"..... सुप्रभात -Dharmendra Kumar
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser