Quotes by parmanand markam in Bitesapp read free

parmanand markam

parmanand markam

@pratibhashali
(254)

बरसात के बूद को लेकर। लंबी दूरी तय करके। बूंद को ले आती है। वजन की परवाह न किए बिना। अपनी नरम पीठ पर रख। आसानी से ले आती है। जवानी की जोश दिखाकर। लोगों को वस में कर देती है। अपना गहरा काला रंग दिखा कर। लोगों को डराती है। धरती को गिला कर। हरियाली फैलाता है। आसमान को छुपा कर। अपना करतब दिकाती है। अपना उम्र घटाकर। हमारा जीवन बढ़ती है। बिजली ऐसी कड़कती है। जैसे कोई योद्धा चीला रहा हो। बिजली ऐसी चमकती है। जैसे कोई शक्ति हो।

Read More

जैसे ही बारिश आती है । खुशियां साथ लाती है। बारिश की एक बूंद। हरियालि साथ लाती है। लोगों को नया जीवन देकर । खुशियों से भर देती है। जैसे ही बारिश आती है। खुशियां साथ लाती है। धरती को भिगोकर। बीजों की अंकुरित से। किसानो की खुशी बढ़ती है। पशुओं को भोजन देकर। उनकी भूख मिटती है । जैसे ही बारिश आती है। खुशियां साथ लाती है। पेड़ों में लगे धूल को। बारिश से चमकाता है। लोगों के उम्मीदों पर खरा उतर कर। खुशियों से भर देती है। बारिश की बूंदे लोगों को जीवन की सीख देकर। चली जाती है। जैसे ही बारिश आती है। खुशियां साथ लाती है।

Read More

‎मैं नादान था जो अपने ही मां का प्यार को समझ न सका वह भी क्या दिन था। जब मैं शरारत करता। पल और मां मुझे डांटती। जब भी मैं गुस्सा करता । प्यार से आकर समझथी। जब भी किसी चीज को लाने की जिद करता । प्यार से मुझे ला कर देती। ना चाहते हुए भी। अपनी बाहों में सुलाथी। मुझे पेट भर खाना खिलाकर। खुद भूखी सो जाती है। मैं भी कितना नादान था। जो अपनी मां का प्यार को समझ न सका। मां ने मुझे बचपन में कितना सजाया का। वही जब मैं बड़ा हुआ। पता नहीं मैंने मां का कितना दिल दुखाया। 9 महीने पेट में रखा। मैंने उसे बहुत दुख दिया। फिर भी वह मुझसे प्यार करती है। वह मां नहीं। मेरे लिए एक योद्धा थी। फिर भी मैंने उसकी कद्र नहीं की। यदि मेरा 7 जन्म भी हो जाए फिर भी मैं उसका एहसान उथार नहीं सकता। मां का एहसान हमेशा के लिए रहेगा।

Read More