मैं नादान था जो अपने ही मां का प्यार को समझ न सका वह भी क्या दिन था। जब मैं शरारत करता। पल और मां मुझे डांटती। जब भी मैं गुस्सा करता । प्यार से आकर समझथी। जब भी किसी चीज को लाने की जिद करता । प्यार से मुझे ला कर देती। ना चाहते हुए भी। अपनी बाहों में सुलाथी। मुझे पेट भर खाना खिलाकर। खुद भूखी सो जाती है। मैं भी कितना नादान था। जो अपनी मां का प्यार को समझ न सका। मां ने मुझे बचपन में कितना सजाया का। वही जब मैं बड़ा हुआ। पता नहीं मैंने मां का कितना दिल दुखाया। 9 महीने पेट में रखा। मैंने उसे बहुत दुख दिया। फिर भी वह मुझसे प्यार करती है। वह मां नहीं। मेरे लिए एक योद्धा थी। फिर भी मैंने उसकी कद्र नहीं की। यदि मेरा 7 जन्म भी हो जाए फिर भी मैं उसका एहसान उथार नहीं सकता। मां का एहसान हमेशा के लिए रहेगा।