सजल
चोरों के मन चोरी भाई.....
चोरों के मन चोरी भाई।
अवसर मिलते करी सफाई।।
रामलला मंदिर के भीतर।
देख रहे उनकी चतुराई।।
फूट गया जब भाँडा उनका।
जेल गए जग हुई हँसाई।।
ऋद्धा थी जिनके रग-रग में।
भक्ति भाव की दौलत पाई।।
थके खिलाड़ी राजनीति के।
मिलकर सबने धूम मचाई।।
नहीं कभी विश्वास धर्म पर।
उनने भी किस्मत अजमाई।।
आस्था पर जब चोट लगी तो।
नेताओं में छिड़ी लड़ाई।।
मनोजकुमार शुक्ल मनोज
जबलपुर