मैं और मेरे अह्सास
पहली नजर
पहली नजर में दिल दिवाना हो गया l
जुल्फों की घनी सी छांव में खो गया ll
इब्तिदा-ए-इश्क़ में हुस्न के सजदे में l
सुहाने ख्वाबों को देखने को सो गया ll
जिन्दगी में रफ़्ता रफ़्ता दिवाना करके l
प्यार के नशीले रसीले पल बो गया ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह