06/02/2026
मन
बिजली से भी ज्यादा तेज
किरणों को भी मात दे
आंखों से न दिखते है
खोखले शरीर में रहता है।
तीव्र गति समय से परे
वर्तमान में रह कर भी
भूत को देखे भविष्य सोचे।
भावनाएं उसकी परिवार है
इन्द्रियां उसकी दोस्त है
हर चीजों की अनुभव कराएं
अनदेखे चीजों की एहसास दिलाएं।
मन ही जगत का मूल है
है वो जीवन जीवन जीने का आधार
मानव जीवन बदल जाए
सुनकर मन की एक पुकार।
मन ही मिथ्या तो जगत मिथ्या
मिथ्या है यह संसार
मन को काबू करने से
खुल जाती है मुक्ति की द्वार।
मन को शांत करने का
ध्यान ही है अच्छी उपाय
ब्रह्माण्ड की ज्ञान प्राप्त कर
आत्मा मोह से मुक्त हो जाए।