Hindi Quote in Poem by Mr joy x

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19/01/2026


‎              रक्त लाल कमल

‎  सौ वर्षों की निद्रावस्था चीर, 
‎             बौद्ध पूर्णिमा की श्वेत चाँदनी में,
‎     खिला एक रक्त-लाल कमल,
‎          जैसे धरती की नसों से निकला गुप्त पाप।

‎  न वह केवल एक फूल था,
‎               न ही सौंदर्य की निशानी,
‎    जिसे भी प्राप्त होगा यह फूल,
‎                     होंगी उसकी तीन इच्छाएँ पूरी। 

‎ कमल के हृदय से उतरी वह इच्छा-परी, 
‎             रक्तिम वस्त्र, नेत्रों में थी ब्रह्माण्ड की चमक,
‎  उसकी मुस्कान में वरदान थी,
‎                 साथ में विनाश का न्योता भी।

‎  राजाओं ने माँगा अमर साम्राज्य,
‎          योद्धाओं ने शक्ति और संतों ने अनंत शांति,
‎  पर इच्छाओं की राह शुद्ध नहीं होती,
‎                और साथ में लाती है बरबादी। 

‎ एक से जन्मा लोभ, दूसरे से अहंकार, 
‎           तीसरे ने रचाया ढोंग को, 
‎      जिससे शुरू हुई महायुद्ध की पुकार।

‎ रक्त से नहलाया धरती को,
‎           नदियाँ रोईं, पर्वत मौन रह गए,
‎  कमल अभी भी खिला था,
‎          बरबादी और भी बढ़ती गई।

‎   इच्छाएँ पूरी होती हैं,
‎       और साथ में कयामत ले आती हैं,
‎  कमल मुरझाया, परी लुप्त हुई,
‎             युद्ध ने छोड़ी केवल राख और स्मृति। 

‎   अंत में जाते-जाते परी ने कहा—
‎             “समय का पहिया घूमेगी,
‎       सौ साल बाद बौद्ध पूर्णिमा की रात को,                     रक्त-लाल कमल फिर से खिलेगी, 
‎                    मैं करूँगी तीन इच्छाएँ पूरी,
‎          जिसकी कीमत है कयामत और बरबादी...”

Hindi Poem by Mr joy x : 112027483
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