रंगों भरी तितली
रंग बिरंगी पंखों वाली,
तितली भंवरे से यूं बोली l
तू है काला गोल मटोल,
मेरे बीच-बीच मत ङोल।
पुष्पों का मीठा रस पीती,
पंखों में पराग भर लेती l
तू फिरता बस इधर-उधर ,
कभी डाल पर कभी है घर l
मेँ रंग भरी प्रकृति की शान,
तू करता बस मीठा गान l
भंवरा बोला यूं मुस्काकर,
अपनी प्यारी छटा बिखराकर l
पीछे तेरे मेँ इसलिए फिरता,
तुझको मीठा गान सुनाताl
तेरे रंगों में मेँ रम जाता,
तितली भंवरा संग कहाता l
प्रभा पारीक