અજાણ્યો પત્ર - 28
बीते कुछ दिनों से मैं तुम्हारी तस्वीरो से दूर रहा हूं, जैसे कोई पंछी अपने पंखों को समेटकर आसमान से दुश्मनी मोड़ ली हो, जैसे कोई मछली बिना पानी के भी कुछ चंद लम्हे जीने लगी हो, वैसे ही मैंने भी तुम्हारी यादों से दुश्मनी मोड़ ली है, वैसे ही मैं अब तुम्हारे बिना भी कुछ चंद लम्हे जीने लगा हूं, पर तुम तो जानती हो ना, मछलियाँ पानी के बिना और पंछी आसमान के बिना सिर्फ तस्वीरों में ज़िंदा रह पाते हैं, और अब मैं भी तुम्हारी तस्वीरों में कहीं समा गया हूँ।