25/09/2025
रूह और देह
एक दिन,
मैंने अपने शरीर को पूचा,
कि कौन हूँ मैं?
तब मेरे नाम सहित
मेरा परिचय देते हुए
उस नश्वर देह ने अपना जवाब दिया ।
फिर जब मैंने अपने रूह को पूछा
कि कौन हूँ मैं?
इसपर अत्मा का जवाब था
परमाया का अंश, शुद्ध आनंदमय चेतना !
मैंने देह और रूह को एक साथ पूछा
कि तुम्हारा मूल व्या है?
नश्वर देह ने जवाब दिया ‘पंच तत्व’।
"मेरा जन्म और मृत्यु निश्चित है।
मैं जल्दी ही संसारिक
माया से बंध जाता हूं
और अन्य सीजो से आसक्त हो कर
भ्रम में जीता हूँ !"
रूह ने उसका उन्टा जवाब दिया -
"मेरा मुल 'परमात्मा' है !
न मेरा जन्म और मृत्यु है,
न ही मैं किसी चीजों से,
आसक्त और मुक्त होता हूँ।
मैं न तो माया और भावनाओं से बंधा हूँ,
न ही शास्त्रों और वेदों के नियम से !
मैं न तो जाति और उसके धर्म से बंधा हूँ,
न ही पुण्य और पाप से ।
मैं इंसान की खोखली देह में बसा
शुद्ध आनंदमय चेतना का,
प्रकृती स्वरूप हूँ
मैं परमात्मा का अंश शून्य शिव हूँ !"
फिर मैंने आत्मा को पूछा,
कि यह परमात्मा है कौन?
उसका जवाब सामान्य मगर गहरा था-
"जिसका न आदि हे न अंत,
ब्रह्माण्ड का सृष्टि करता शून्य शक्ति !
जिसके बारे में किसी को ज्ञात नहीं,
जो बिना किसी परिवर्तन के है!
वे बिना किसी रूप और आकार के
अपने आप में ही संपूर्ण है !"
हालांकि, मुझे मेरा जवाब मिल गया था,
मगर मैं उस शून्य शिव
और महाशून्य शक्ति को समझ न पाया ।