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जब से कर ली तूने मेरे दिल की चोरी कन्हैया, सारी चोली मोरी रहती है कोरी
बरसे रंग नीले पीले, लाल, गुलाल; पर काया मोरी, रह गई कोरी कि कोरी
तुझ बिन होली नहीं भाये, कौन करे ठिठोली , न कोई करे बर जोरी
मोहन, तरस गई है अखियान मोरी, नींदे भी तूने कर ली चोरी
अब रंग न भाये मोहे, न भावे साज- श्रीनगर, मांग मोरी सुनी, कलाई कोरी
खेलना आज तेरे मथुरा में होली, कि टोली आयेगी न वहां ब्रिज वासी की टोली
"अनार "