राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड के प्रस्तावित क़ानून की कुंजी
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(1) यह क़ानून सरकार द्वारा हथियाये जा चुके सभी देवालयों को सरकारी नियन्त्रण से मुक्त करता है।
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(2) यह कानून सभी हिन्दूओ के लिए एक राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड (R.H.B.) नामक ट्रस्ट का गठन करेगा, जिसका प्रमुख हिन्दू संघ प्रधान कहलायेगा। हिन्दू संघ प्रधान वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा, और यदि आप उसके काम-काज से संतुष्ट नहीं है, तो वोट वापसी पासबुक के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर उसे निकालने और किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकते है। आप अपनी स्वीकृति SMS, ATM या मोबाईल एप से भी दे सकेंगे।
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(3) भारत के निम्नलिखित नागरिक हिन्दू बोर्ड के सदस्य हो सकेंगे :
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उन सभी समुदायों, पन्थो, सम्प्रदायों के अनुयायी जो स्वयं को हिन्दू या सनातनी या सनातनी हिन्दू कहते है।
सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि पन्थो के अनुयायी भी यदि इस बोर्ड में जुड़ना चाहते है तो इसकी सदस्यता ले सकेंगे।
यह क़ानून इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी एवं अन्य धर्म जो भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर उत्पन्न हुए है, पर कोई दायित्व या प्रतिबन्ध नहीं लगाता। इन धर्मो के अनुयायी स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे
[ टिप्पणी : यह क़ानून किसी भी प्रकार से उन नागरिको पर हिन्दू होने का लेबल नही लगाता जो स्वयं को हिन्दू नहीं कहते या हिन्दू नहीं कहलाना चाहते। उदाहरण के लिए यदि कोई जैन या सिक्ख पंथ का अनुयायी इसमें नामांकित होता है तो भी उसकी कानूनी-धार्मिक-सामाजिक पहचान प्रवृत कानूनों के अनुसार जैन / सिक्ख धर्म के अनुयायी के रूप में बनी रहेगी ]
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(4) प्रधानमंत्री एक अधिसूचना जारी करके राम जन्म भूमि देवालय, अयोध्या का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड को सौंपेंगे। इसके अलावा हिन्दू बोर्ड उन सभी देवालयों का भी प्रबंधन करेगा जिन्हें किसी मंदिर के मालिको ने इसे स्वेच्छा से सौंप दिया है।
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(5) यदि एवं जब भारत के सभी मतदाताओ में से 45 करोड़ मतदाता इसी कानून में दी गयी जनमत संग्रह प्रक्रिया का प्रयोग करते हुए निचे दिए 3 मंदिरो के भूखंड बोर्ड को सौंप देते है तो हिन्दू बोर्ड इन मंदिरों की देख रेख करेगा :
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कृष्ण जन्म भूमि देवालय, मथुरा
काशी विश्वनाथ देवालय, वाराणसी
अमरनाथ देवालय, कश्मीर
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(6) प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय सनातन संप्रदाय रजिस्ट्रार नामक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जो उन सम्प्रदायों को लोकतांत्रिक रूप से प्रबंधित करने में व्यवस्थागत सहयोग करेगा जिनका उद्भव भारतीय उपमहाद्वीप की सनातन संस्कृति है, तथा वे एक पंथ या सम्प्रदाय के रूप में मान्यता प्राप्त धार्मिक ट्रस्ट है। ऐसे धार्मिक सम्प्रदायों में जैन, बौद्ध, शैव, वैष्णव, आर्य समाज आदि सभी भारतीय संप्रदाय शामिल है। रजिस्ट्रार का ट्रस्ट की धार्मिक मान्यताओ में कोई दखल नहीं होगा। सिख पंथ भी एक भारतीय संप्रदाय है किन्तु यह पहले से SGPC द्वारा शासित है, अत: सिक्ख पंथ रजिस्ट्रार के दायरे से बाहर रहेगा।
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(7) यदि संघ प्रधान, राष्ट्रिय सनातन रजिस्ट्रार, उनके स्टाफ एवं नागरिको के मध्य कोई आपसी विवाद होता है, या किसी मंदिर धारण करने वाले ट्रस्ट आदि के बीच स्वामित्व का कोई मामला आता है तो मामले का निपटान हिन्दू बोर्ड की सदस्य सूची में दर्ज नागरिको की जूरी करेगी। यदि आपका नाम बोर्ड की मेम्बर लिस्ट में है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको मामला सुनकर फैसला देना होगा। जूरी का गठन बोर्ड की मेम्बर लिस्ट से लॉटरी द्वारा किया जाएगा। मामले की प्रकृति अनुसार जूरी में 12 से 1500 तक नागरिक हो सकेंगे।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो Pm को एक पोस्टकार्ड / ट्विट भेजे – प्रधानमंत्री जी, कृपया हिन्दू बोर्ड गेजेट में छापे , #HinduBoard
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हिन्दु बोर्ड का पूरा ड्राफ्ट इस लिंक में देखें -- https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/2241776019273955
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