मेरे यार अक्सर पूछते हैं मुझसे—
कि संतोष, तू सब कुछ हासिल कर सकता है,
फिर अपनी उस मोहब्बत को क्यों छोड़ बैठा है?
तो मैं भी बस मुस्कुरा कर कह आया—
कि मेरे छोड़ने के बाद वो किसी और के हुए,
और कमाल देखिए... जिन्हें वो हासिल हुए,
उन्हें भी वो 'पूरे के पूरे' न हुए!क्योंकि छोड़ी हुई मोहब्बत को मैं दोबारा हासिल नहीं करता,
मोहब्बत के खेल में मैं कभी 'व्यापार' नहीं करता।
जो कभी हमारी नज़रों में बहुत 'महंगे' थे, आज कौड़ियों के भाव सस्ते हो गए...
और सच तो ये है दोस्तों...
कि इतनी सस्ती चीज़ों को, मैं अब पलटकर देखना भी पसंद नहीं करता।"