"कभी-कभी ज़िंदगी की रफ़्तार से थककर, बस एक ऐसे कोने की तलाश होती है जहाँ घड़ी की सुइयाँ नहीं, बल्कि दिल की धड़कनें सुनाई दें। खिड़की से छनकर आती वो सुनहरी धूप, मेज़ पर रखी चाय की गर्म प्याली और चारों ओर ये हरी-भरी खामोशी... जैसे कह रही हो कि ठहर जाओ, अभी भागने की ज़रूरत नहीं है। असली सुख महलों में नहीं, बल्कि इन छोटे-छोटे पलों में छुपा है जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। आज बस मैं हूँ, मेरा सुकून है और ये ख़ूबसूरत अहसास कि ज़िंदगी सच में बहुत हसीन है।"