**ग़मों का तोहफ़ा दे जाऊँगा,
हर दुआ में बद्दुआ का अक्स दे जाऊँगा।
शायद तुम्हें समझ न आए अभी,
पर कुछ ऐसा कर जाऊँगा।
जब खुशियाँ होंगी तुम्हारे क़दमों में,
तब तुम्हारी गुमनामी को खुलकर बताऊँगा।
अभी लफ़्ज़ों में ज़िक्र नहीं तुम्हारा,
पर एक दिन हर शायरी में
तेरा ही नाम लिख जाऊँगा।**