मैं और मेरे अह्सास
लुप्त होती स्त्रियाँ
पुरुष समोवड़ी बनने की होड़ में l
कुछ कर दिखाने व भाग दौड़ में l
घर आँगन से लुप्त होती स्त्रियाँ ll
करियर बनाने की भगदड़ में l
खुद की हेसियत की ज़ंग में l
घर आँगन से लुप्त होती स्त्रियाँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह