शीर्षक: सफर, सुकून और तुम
भाग 1: मन की शांति की तलाश
जब शहर की भीड़ में शोर बहुत बढ़ जाए,
जब अपनों की बातों में भी खोट नज़र आए,
तब ठहर जाना तुम किसी दरिया के किनारे,
जहाँ लहरें सुनाती हैं सुकूँ के अनकहे नज़ारे।
यह जीवन है, कोई दौड़ नहीं है मेरे दोस्त,
यहाँ हर फूल के खिलने का अपना एक वक्त है,
जो पीछे छूट गए, उन्हें मुड़कर मत देखना,
जो हाथ में है, बस उसी को प्यार से सहेजना।
सुकून कहीं बाहर की दुनिया में नहीं मिलता,
यह तो मन के किसी कोने में चुपचाप है खिलता।
ज़रा अपनी धड़कनों की लय को पहचान कर देखो,
खुद की सोहबत में कभी एकांत में बैठकर देखो।
भाग 2: प्रकृति और सादगी का सौंदर्य
क्या तुमने कभी उगते सूरज की लाली को छुआ है?
क्या ओस की बूंदों से तुम्हारा कभी वास्ता हुआ है?
वह जो चिड़ियों की चहचहाहट सुबह सुनाई देती है,
वही तो खुदा की सबसे पाक गवाही देती है।
मिट्टी की वो सोंधी खुशबू जब बारिश में घुलती है,
तमाम मुश्किलों की गांठें धीरे-धीरे खुलती हैं।
पहाड़ों की ऊंचाइयों से जब झरना गिरता है,
वह सिखाता है कि गिरकर भी आगे बढ़ा जाता है।
हवा का वो झोंका जो जुल्फों को सहला जाए,
मानो कायनात का कोई दूत तुम्हें गले लगा जाए।
इन छोटी-छोटी खुशियों को अपनी झोली में भर लो,
जी भर के इस कुदरत की सादगी से प्यार कर लो।
भाग 3: स्वयं की स्वीकार्यता (The Self)
तुम जैसे भी हो, खुदा की एक मुकम्मल कृति हो,
तुम अधूरी नहीं, अपनी ही कहानी की पूरी कृति हो।
न खुद को किसी से कम आंकना, न किसी से तुलना करना,
तुम्हें बस अपनी ही रूह के उजालों से है निखरना।
चोट लगी है अगर, तो उसे भरने का वक्त दो,
आँखों में पानी है, तो उसे बहने का वक्त दो।
रोने से कोई कमज़ोर नहीं हो जाता मेरे यार,
हल्का हो जाता है मन, और बढ़ जाता है प्यार।
अपनी खामियों को भी तुम गले से लगा लेना,
टूटे हुए टुकड़ों से ही एक नया घर बना लेना।
जो कल था, वह बीत गया, एक सपना बनकर,
जो आज है, उसे जियो तुम एक अपना बनकर।
भाग 4: रिश्तों की मिठास
रिश्ते धागों की तरह होते हैं, कोमल और महीन,
उन्हें उम्मीदों के बोझ से मत बनाना कभी गमगीन।
किसी की मुस्कुराहट की वजह बन सको तो बनना,
किसी डूबते हुए का सहारा बन सको तो बनना।
कड़वाहट को छोड़कर बस मीठे बोल बोलना,
खिड़कियाँ अपने दिल की हर किसी के लिए खोलना।
कहाँ लेकर जाओगे ये नफरतें और ये दूरियाँ,
इंसान है हम, बस छोटी सी हैं अपनी मजबूरियाँ।
एक हाथ बढ़ाओगे, तो सौ हाथ मिल जाएंगे,
सूखे हुए बागों में भी फिर फूल खिल जाएंगे।
प्यार बांटने से कभी घटता नहीं है दुनिया में,
यह वो खज़ाना है जो मिलता है बस दरियादिली में।
भाग 5: उम्मीद का दीया
रात कितनी भी काली हो, सवेरा तो आएगा ही,
वक्त का ये पहिया एक दिन रंग दिखाएगा ही।
धैर्य रखना कि अंधेरे के बाद ही उजाला होता है,
मुश्किलों के बाद ही तो खुशियों का बोलबाला होता है।
अपने सपनों की उड़ान को कभी रुकने मत देना,
परिस्थितियों के आगे खुद को झुकने मत देना।
तुम सागर की लहर हो, तुम आसमान का तारा हो,
तुम इस सारी सृष्टि का सबसे प्यारा सितारा हो।
जब पढ़ोगे इन पंक्तियों को, तो एक बार मुस्कुराना,
अपनी उदासियों को पुराने संदूक में दफनाना।
उठो, कि एक नई सुबह तुम्हारा इंतज़ार कर रही है,
ज़िंदगी बाहें फैलाकर तुम्हें प्यार कर रही ह