मयखाने
जब से हुई है मेरी आमद शहर में तेरे,
मुझसे रूठे-रूठे सारे मयखाने हैं।
जब से हुई है आमद मेरी शहर में तेरे,
जामों में भी अब तन्हाई के अफ़साने हैं।
पहले जो हर मोड़ पे आबाद हुआ करते थे,
आज निगाहों से वो सब बेगाने हैं।
तेरी एक झलक ने ऐसा जादू कर डाला,
कि शराब से ज़्यादा तेरे दीवाने हैं।
अब न साक़ी की अदाओं में वो बात रही,
न उन महफ़िलों में पुराने तराने हैं।
तेरे इश्क़ ने मुझको ऐसा मदहोश किया,
कि मयखाने भी अब मुझसे अनजाने हैं।