Hindi Quote in Poem by Aanchal Sharma

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मां की ममता

रात की ठंडी हवा में जब मैं रोया था,
तो किसी ने अपनी ओढ़नी से मुझे ढक लिया था,
वो कोई फरिश्ता नहीं...
मेरी मां थी — जिसने खुद को भुला दिया था।

जब मैं गिरा, तो ज़ख़्म मुझे लगे,
पर दर्द उसकी आँखों से बह गया,
मेरे हर आंसू को उसने यूं पी लिया,
जैसे खुद की प्यास से सौदा कर लिया।

वो भूखी रही, ताकि मैं खा सकूं,
वो जागती रही, ताकि मैं सो सकूं,
हर मुश्किल को मुस्कुराहट से ढकती रही,
ताकि मैं ज़िंदगी में हंसना सीख सकूं।

कभी डांटा, तो लगा क्यों नाराज़ हुई,
पर अब समझता हूं —
वो डांट नहीं, दुआ थी,
जो मुझे गिरने से पहले संभाल गई।

अब जब दूर हूं, तो एहसास होता है,
उसकी गोद ही असली जन्नत थी,
जहां कोई डर नहीं था,
सिर्फ सुकून और मोहब्बत थी।

मां... तू कहां ढूंढूं तुझे इस भीड़ में,
हर खुशी में तेरी कमी खलती है,
तेरे बिना ये घर तो है दीवारों का जंगल,
तेरे बिना मेरी दुनिया अधूरी लगती है।

अगर जन्नत सच में कहीं है ऊपर,
तो वहां तेरे कदमों की खुशबू होगी,
क्योंकि तेरे बिना कोई दुआ मुकम्मल नहीं होती,
मां... तू ही खुदा की सबसे खूबसूरत तस्वीर होगी।

Hindi Poem by Aanchal Sharma : 112005471
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