पापा मेरे सुपर हीरो
जब मैं गिरा था पहली बार,
तब तुमने थाम लिया था हाथ,
ना कुछ कहा, ना जताया ग़म,
बस बन गए मेरी दुनिया का साथ।
रातों को जाग कर जो मेरी तबीयत पर ध्यान देता था,
भूखा रहकर भी जो मेरे लिए खाना छोड़ देता था,
कभी आँखों से नींद चुरा कर,
मेरे सपनों को अपने पसीने से सींचता था।
तुम्हारे कंधों पर बैठ कर
मैंने दुनिया को ऊँचा देखा था,
पर तुम्हारे झुकते कंधों का
दर्द कभी समझ ना सका था।
तुम्हारी जेबें हमेशा खाली सी थीं,
पर दिल खजानों से भरा होता था,
मेरी हर फरमाइश के पीछे
तुम्हारा हर सपना कुर्बान होता था।
तुमने कभी ‘थक गया हूँ’ नहीं कहा,
कभी अपने दुख मुझसे नहीं बांटे,
तुम बस मुस्कुराते रहे
जैसे तुम्हें दर्द छूता ही न हो।
जब कभी मैं रोया,
तुम्हारी आँखें छुपकर भीग जाती थीं,
पर सामने आकर तुम
हमेशा चट्टान बन जाते थे।
अब जब खुद को बड़ा समझ बैठा हूँ,
तो तुम्हारी जगह समझ नहीं पा रहा हूँ,
हर छोटी बात पर जो तुम डांटते थे,
वो आज जीवन का पाठ बन गया है।
तुम्हारे दिए संस्कारों की छाया में
मैं आज भी खुद को सुरक्षित पाता हूँ,
पापा, तुम मेरी ताकत हो,
तुम्हारे बिना ये जीवन अधूरा सा लगता है।
अगर इस दुनिया में कोई भगवान ज़िंदा है,
तो वो मेरे लिए तुम हो पापा,
ना कोई केप पहनते हो, ना उड़ते हो,
पर मेरे दिल के सुपरहीरो सिर्फ तुम हो पापा।
पापा,
तुम्हारी वो खामोशियाँ अब बहुत चुभती हैं,
कभी सोचा नहीं था कि
तुम्हारे बिना भी साँसे चलेंगी...
पर अब हर धड़कन में
तुम्हारा नाम बस गया है।
समर्पित उन सभी पिताओं को,
जिन्होंने चुपचाप अपना सारा जीवन
सिर्फ अपने बच्चों की ख़ुशियों के लिए जी दिया।