ज़रूरी तो नहीं
जिंदगी में गिरना, टूटना,संभलना, ये सब लाजमी है,
पर हर दफा टूटने पर बिखरु ये जरूरी तो नहीं
जिंदगी में मां -बाप , भाई - बहन, दोस्त सब जरूरी है,
पर सबके खुशियों का ख्याल रखते -रखते खुद की खुशियों की बलि चढ़ा दूं ज़रूरी तो नहीं।
हां मैं एक लड़की हूं पर हर बार मेरे कपड़ों और मेरे बोलने के सलीके से ही मेरे लड़की होने का एहसास हो
ये जरूरी तो नहीं।
बाप के नाम से पहचान हैं, खुद के वजूद भी की तलाश है
पर उस नई पहचान के लिए गले में 2 हाथ का मंगलसूत्र और मांग में सिंदूर हो ये जरूरी तो नहीं,
बेटी - बहन का फर्ज निभाते निभाते, अपने सपनों की अर्थी पर अपनी डोली सजाऊं ये ज़रूरी तो नहीं
माना कि मेरे सपने बड़े हैं, और मेरी पहुंच से अभी बहुत दूर है,
पर बिना मंजिल के मिले मैं थक हार निराश हो जाऊं ये ज़रूरी तो नहीं,
जरूरी है जिंदगी में दुःख - सुख और आंसू भी,
पर हर बात के लिए अपने होठों की हंसी भूल जाऊं
ये जरूरी तो नहीं।