साल 2145 था। दुनिया पहले जैसी नहीं रही थी। शहर आसमान में तैरते थे, कारें सूर्य की रोशनी से चलती थीं, और रोबोट इंसानों के साथ काम करते थे। लेकिन सबसे बड़ी खोज थी आर्कटिक की बर्फ के नीचे छुपा एक छोटा सा क्रिस्टल, जो समय को बदल सकता था।
डॉ. आरिया सेन, एक प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिक, सबसे पहले इसे देखने गई। उसने पाया कि जैसे ही वह क्रिस्टल के पास बात करती, यह चमकने लगता—लगभग ऐसा लगता जैसे यह जीवित हो। महीनों के प्रयोगों के बाद उसे एहसास हुआ कि यह छोटे-छोटे वस्तुओं के लिए समय को धीमा या तेज कर सकता है। एक फूल जार में मिनटों में बढ़ गया, और एक घड़ी का कांटा सेकंडों से भी धीमे चलने लगा।
उत्साहित होकर, आरिया ने एक मशीन बनाई जो क्रिस्टल की शक्ति का उपयोग कर सके। उसने सोचा कि समय को तेज करके बीमारियों का इलाज किया जा सकता है या समय को धीमा करके जीवन बचाया जा सकता है। लेकिन उसका सहायक, लियो, चेतावनी देता है: “समय के साथ छेड़छाड़ खतरनाक है। हम प्राकृतिक क्रम को तोड़ सकते हैं।”
एक रात, आरिया अपनी जिज्ञासा रोक नहीं पाई और प्रयोग करने लगी। उसने एक छोटे रोबोट को तेज़ समय में नई चीज़ें सीखने के लिए चलाया। लेकिन कुछ गलत हो गया। क्रिस्टल की चमक असंभव रूप से बढ़ गई, और अचानक उनके लैब का हर चीज़ धुंधला हो गया। समय पानी की लहरों की तरह झिलमिलाने लगा। बाहर लोग कुछ ही सेकंड में बड़े और छोटे हो गए, और शहर में अराजकता फैल गई।
समझते हुए कि खतरा बढ़ रहा है, आरिया ने मशीन को सावधानी से नियंत्रित किया और क्रिस्टल को उसकी जगह बर्फ में वापस रखा। धीरे-धीरे दुनिया सामान्य हो गई। आरिया जान गई कि यह क्रिस्टल इंसानों के लिए बहुत शक्तिशाली था और इसे नियंत्रित करना असंभव था।