आत्मा, ईश्वर और अस्तित्व अत्यंत सूक्ष्म और सरल हैं।
उन्हें समझने के लिए किसी बड़ी साधना या जटिल सोच की नहीं,
बल्कि मन की निर्मलता और अहं के लय की आवश्यकता है।
लेकिन मनुष्य स्वयं इस सहजता को कठिन बना देता है।
"मैं" और "तुम" का भेद एक दीवार बन जाता है,
जिसके कारण सत्य दूर लगता है।
अस्तित्व में कोई उलझन नहीं — उलझन केवल मानव निर्मित है। अज्ञात अज्ञानी