"चाँद से गुस्सा"
बस बहुत हुआ, अब तुझसे कोई बात ना करूंगी,
ऐ चाँद, अब और तुझसे सवालात ना करूंगी।
जितना मर्ज़ी रहो तुम मशरूफ़ सितारों संग अपने,
अब और दखल-अंदाज़ी तेरी हयात में ना करूंगी।
अब और नहीं सह पाऊँगी तेरी बेरुख़ी का असर,
मैं दिल को अब तेरे लिए और आहात ना करूंगी।
तुम भी मिल गए लगते हो इस शरारती हवा के साथ
मैं अब तुम दोनों से अपने ग़म-ए-बयानात ना करूंगी।
बस "कीर्ति" अब कलम भी कह रही है आराम दे मुझे,
मैं अब यहाँ कोई ग़ज़ल-ओ-नग्मात ना करूंगी।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️