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माँ की प्रतीक्षा
आँगन में खड़ी है माँ टकटकी लगाए,
राहों को देखे, पलकें सजाए।
पग-पग पर मन कहे यही बात,
"कब आएगा मेरा लाल मेरे पास?"
बरसों की दूरी, क्षण जैसे भारी,
सपनों में भी देखे उसकी सवारी।
दीवारें सुनतीं माँ का स्वर,
"बेटा आएगा, रोशन होगा घर।"
थाली सजाए आरती की लौ,
मन में उमंग, नयन में शोभा।
पाँव की आहट सुनते ही दौड़े,
बेटे को सीने से कसकर जोड़े।
खुशियों से भर जाता घर-आँगन,
माँ का धीरज पाता संजीवन।
उस पल माँ के लिए जग थम जाए,
बेटा जब लौटकर घर आ जाए।