"हवा की शरारत"
ऐ हवा, शायद तूने मेरा उन्हें पयाम ना दिया,
मेरी मोहब्बत का असर तुमने तमाम ना दिया।
कहना था उन्हें, मेरे दिल की सदा को सुने,
पर मेरे दिल के हाल को कोई मक़ाम ना दिया।
हौले से छूना था ख्यालों को उनके,
पर मेरे लबों का तुमने सलाम ना दिया।
मेरे जज़्बातों का कोई असर उन्हें पहुँचा नहीं,
इसलिए उन्होंने अल्फ़ाज़ों में कोई नाम ना दिया।
ऐ हवा, तेरी शरारत ने खेला बड़ा तमाशा,
“कीर्ति” की मोहब्बत को उन्होंने कोई अंजाम ना दिया।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️