पल बीत जाते हैं...
लम्हे गुजर जाते हैं...
वो मुड़कर भी नहीं देखते,
पर हम फिर भी उन्हें देखकर मुस्कुराते हैं।
उन्हीं की यादों में कहीं खोए रहते हैं।
वो हमसे नाराज़ हो जाते हैं...
और हम,
भटके मुसाफ़िर की तरह
मंज़िल उन्हीं में ढूंढते हैं...
इन राहों में भी
कुछ पल चुपचाप बीत जाते हैं।