तंग हूं.... सुकून से
तंग हूं अब मैं इस झूठे सुकून से,
दिल जलता रहा हर पल इस जुनून से।
खामोशियों का बोझ इतना बढ़ा कि,
थक गया हूँ मैं अपने ही सुकून से।
सपनों की चुभन भी आराम न दे पाई,
कैसे जी लूँ मैं इन अधूरे फ़ुज़ून से।
अब तो तूफ़ान ही अच्छा लगे मुझको,
क्योंकि डर लगता है इस नक़ली सुकून से।
डीबी-आर्यमौलिक