Hindi Quote in Blog by Ranjeev Kumar Jha

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"प्रेम!"
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कल और आज का तुलनात्मक चित्रण!
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​आज प्रेम के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर मन में एक सवाल उठता है—क्या प्रेम सच में इतना आसान हो गया है? या हमने इसकी पवित्रता को ही बेच दिया है?
​प्रेम पत्र बनाम चैटिंग-शब्दों का मोल!!
​पुरानी पीढ़ी- प्रेम का पहला कदम ही एक साधना थी। प्रेमी मीलों दूर या हास्टल में साथ रहकर भी भावनाओं को कागज़ पर उकेरते थे। प्रेम पत्र महीनों के इंतज़ार के बाद पहुँचता था, और उसका हर एक शब्द एक-एक भावना का प्रतीक था। एक-दूसरे को समझने के लिए घंटों सोचा जाता था कि कौन सा शब्द लिखें, कौन सी बात कहें। यह एक ऐसी कला थी, जो आज के 'ओके', 'फाइन' और 'हम्म' की दुनिया में पूरी तरह से खो चुकी है।

​आज की पीढ़ी- अब प्रेम की शुरुआत एक 'हाय' से होती है और खत्म 'ब्लॉक' पर। 'मैसेज सीन' हो जाए तो दिल उछलने लगता है, और अगर देर से जवाब आए तो 'ब्रेकअप' की धमकी। शब्दों का मोल ही क्या रहा? अब तो भावनाओं को 'इमोजी' में समेट दिया गया है। कहाँ वो दिल से निकली शब्दों की छुपी महक और कहाँ ये 'कॉपी-पेस्ट' वाले फॉरवर्डेड संदेश।

​पहला मिलन बनाम ओयो मिलन-दिल से डील तक!
​पुरानी पीढ़ी- पहला मिलन एक धैर्य का उत्सव था। छुप-छुपकर मिलना, पार्क में,क्लास और पुस्तकालय में घंटों छूप छूप कर एक-दूसरे को देखना, और बस आँखों ही आँखों में बातें करना—इसी में प्रेम का सार था। यह प्रेम शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक था।

​आज की पीढ़ी-आज के प्रेम की तो परिभाषा ही बदल गई है। अब तो 'ओयो' में मिलना ही प्रेम की पहली शर्त बन गई है। कहाँ वो पार्क में बैठकर बातें करना और कहाँ सीधे ओयो में सीधे 'डील' पर आना!

​प्रेम में गरिमा बनाम वासना का बोलबाला- रिश्ते का सौदा!
​पुरानी पीढ़ी-प्रेम एक जीवन भर का वादा था। वह 'कमिटमेंट' था, कोई 'ट्रायल पैक' नहीं। यह रिश्ते की गरिमा को बनाए रखने के लिए त्याग और समर्पण की मांग करता था। प्रेम में धैर्य था, प्रतीक्षा थी, और एक-दूसरे के लिए सब कुछ करने का जुनून था।

​आज की पीढ़ी-अब प्रेम की जगह 'टाइम पास' ने ले ली है। जब मन भरा तो 'ब्रेकअप' और कुछ ही दिनों बाद नए साथी की तलाश। प्रेम अब वासना का पर्याय बन गया है, जहाँ रिश्ते भावनाओं से नहीं, बल्कि शारीरिक सुखों से चलते हैं।
​क्या हमने इस तकनीकी युग में प्रेम का वास्तविक अर्थ ही खो दिया है? या आज का प्रेम सिर्फ़ एक क्षणभंगुर आकर्षण है, जो इंटरनेट की स्पीड से आता है और उसकी ही गति से चला जाता है?
आर के भोपाल।

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