Hindi Quote in Shayri by Kirti kashyap

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"विरासत-ए-हया"

वो कहते हैं कि मैं उल्फ़त करूँ और ख़जालत छोड़ दूँ,
बे-इंतहा मरते हैं मुझ पर कि मैं अदावत छोड़ दूँ।

कहते है नज़र क्यों चुराती हो ज़ब सामने आता हूँ,
अरे पुराने ख़यालात की लड़की हूँ कैसे शराफत छोड़ दूँ।

मेरे वजूद में रक्खी हैं सदियों की तहज़ीबें,
सलीक़ा-ए-ज़िंदगी क्यों मैं विरासत छोड़ दूँ।

वो कहते हैं मुस्कुरा दूँ मैं ज़माने की नज़र के लिए,
मैं कैसे अपनी तन्हाई की हक़ीक़त छोड़ दूँ।

"कीर्ति" ऐ दिल-ए-आशिक़, समझ ले इक बात-ए-ख़ामोश,
मैं कैसे अपनी हया-ओ-इबादत छोड़ दूँ।

Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️


उल्फ़त – मोहब्बत, प्यार
ख़जालत – लज़्ज़ा, शर्म, झिझक, संकोच
अदावत – बैर, दुश्मनी, नफरत
तहज़ीबें – संस्कृति, परंपरा, सभ्यता
सलीक़ा-ए-ज़िंदगी = जीने का ढंग, जीवन का सलीका
विरासत – धरोहर, पूर्वजों से मिली चीज़ें/संस्कार
दिल-ए-आशिक़ – प्रेम करने वाले का दिल
बात-ए-ख़ामोश – ख़ामोशी में छिपा संदेश
हया-ओ-इबादत – लज्जा और उपासना या मर्यादा और ईश्वर-भक्ति

Hindi Shayri by Kirti kashyap : 111997766
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