चाक-ए-दिल का मेरे तबीब कर दे रफ़ू, तेरे सिवा किधर देखूँ।
है हर-सू, तेरी-बू, कू-ब-कू, जिधर देखूँ, जिधर देखूँ।
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️
चाक-ए-दिल = टूटा हुआ दिल
तबीब = इलाज करने वाला, दिल का हकीम
रफ़ू = टाँके लगाना, सिलाई करना
हर-सू, = चारो तरफ
बू = खुशबू
कू-ब-कू = गली दर गली