दर्द से तड़पकर सांसे छूट रही है
आंखों में उम्मीद की ज्योति जल रही है
मुझे मत रोको सिसकने से
मेरी उम्मीद जल रही है।।
जीवन के होड़ में,
सुविधाओं को पाने जो निकला हूं,
बचपन छूटी तक नहीं थी,
जवानी पाने निकला हूं।।
उम्मीदों के भवसागर में
ख्वाइशों की डुबकी लगाने निकला हूं,
अभी अभी नींद खुली और पता लगा,
मैं तो बस गर्व ने निकल एक बच्चा हूं।।