✧ सृष्टि का खेल ✧
सृष्टि गंभीर नहीं,
गंभीरता से फूल नहीं खिलते।
गंभीरता से तारे नहीं चमकते,
गंभीरता से प्रेम जन्म नहीं लेता।
यह सब एक खेल है —
ईश्वर की लीला,
जहाँ आँसू भी अभिनय हैं,
और हँसी भी।
तुम इसे गंभीर मानते हो,
तो बोझ उठाते हो।
इसे खेल मानते हो,
तो उड़ान भरते हो।
ईश्वर ने तुम्हें खिलाड़ी बनाया है,
दर्शक नहीं।
खेलो,
मुक्त होकर,
हलकापन ही इस खेल का धर्म है।
✍🏻 — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓽 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲