तराने जिंदगी के---
जिंदगी के तरानों में ना कोई उलझन होगी।
इबादत मोहब्बत खुदा की रहमत होगी।!
इधर जिंदगी का तराना उधर खुदाई मोहब्बत होगी।!
रहमत होगी खुदा के किसी रहम की नहीं कोई जरूरत होगी देखने वालों के नजर का नूर।
इधर नगमा सनम छेड़ेंगे उधर जमाने में हलचल होगी।!
हुश्न से घायल नहीं इश्क का हुश्न होगी।
मिलन को ना रोक पाएगा जमाना।
इधर हुश्न से हट जाएगा नकाब दीदार जन्नते हूर होगी।!
कलम की बंदिशें नहीं गजल दिल की होगी।
अफसाने दुनिया मशहूर होंगे।
सनम दामन के दरमियान महफिलों में शमा रौशन इधर मैं और तू उधर दुनिया मगरूर होगी!।
ना वो मेरे पीछे ना मैं उनके आगे
लम्हा लम्हा कदम कदम हमदम उनकी नजरों ने कह दिया सब कुछ।
मेरी नजरों ने जाना देखा दुनिया ने बन गया अफसाना, सजने और संवरने दोऔर कुछ निखरने दो मैं सिर्फ देखता रहूं।!
फितरत नहीं शोहरत के साथ पैदा शोहरत का तूफान बढ़ने दो।i
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!