"बस तुम हो..."
चाँदनी रात में भी एक कमी सी लगती है,
जब तुम्हारी बातें हवा में नहीं बहती हैं।
खामोशी भी कुछ कह जाती है इन सन्नाटों में,
जब यादों में तुम्हारी मुस्कान खिल जाती है।
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मैंने इश्क़ को महसूस किया है तुम्हारी आँखों में,
न कोई वादा, न कोई शब्द — बस एक नज़र काफी थी।
जब तुम पास होते हो, तो वक़्त भी रुक जाता है,
और जब दूर होते हो, तो हर लम्हा अधूरा लगता है।
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तुम्हारी हँसी मेरे जीने की वजह बन गई,
और तुम्हारा ग़म मेरी ख़ामोशी की आवाज़।
अगर इश्क़ एक तूफान है, तो तुम उसकी ठंडी बूँद हो,
अगर रात अंधेरी है, तो तुम उसकी चाँदनी हो।
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तुम साथ हो, तो ज़िंदगी एक मधुर गीत लगती है,
न हो, तो हर धड़कन बेमायने सी लगती है।
मैं कुछ नहीं चाहता —
न कोई कसम, न कोई नाम,
बस तुम…
सिर्फ तुम हो मेरी हर सुबह और हर शाम।