"""""""""पलक""""""
तेरी पलकों पे ख्वाब मैं रख दूँ,
तेरे होंठों पे अपना नाम लिख दूँ।
तू जो बोले तो लगे जैसे,
हर धड़कन कोई गीत कहे।
तेरी सांसों की सरगम में,
मैं हर लम्हा ढलता जाऊं।
तू जो साथ हो ज़िन्दगी में,
हर मोड़ पे खिलता जवानी जवानी।
तू है मेरा साज, मैं तेरी रागिनी,
तेरे बिना अधूरी मेरी ये कहानी।
हर शब्द तुझसे, हर रंग तुझमें,
तू है तो दुनिया लगे एक रवानी।
तेरे साथ चलूं तो लगे ये ज़मीन,
पैरों तले कोई नर्म सी ज़ुबानी।
तू है वो एहसास जो कह ना सकूं,
फिर भी हर साँस में बजती है तू ही कहानी।
तेरी हँसी में छुपा है उजाला,
तेरे स्पर्श में मौसम का प्याला।
तू जो देखे तो लगे मुझे,
हर चोट पे मिल गया मरहम वाला।
तू हो तो सन्नाटा भी गीत लगे,
तेरे बिना भीड़ में भी रीत लगे।
तेरा नाम जब लिखूं रेत पे,
समुंदर भी चुपचाप गीत कहे।
तू है मेरा साज, मैं तेरी रागिनी,
तेरे बिना अधूरी मेरी ये कहानी।
हर शब्द तुझसे, हर रंग तुझमें,
तू है तो दुनिया लगे एक रवानी।
कभी तू दूर हो तो लगता है,
हर रंग जैसे बुझ गया हो।
तेरे बिना जो लम्हे बीते,
वो जैसे खुद पे शर्मिंदा हो।
पर तू आए तो सब कुछ सजे,
फूलों से भरी हर पगडंडी लगे।
तेरे आने से जैसे,
हर साज़ फिर से जी उठे।
तू है मेरी कविता की पहली पंक्ति,
तू है मेरी कहानी का आख़िरी सच।
तू है वो जो कहे बिना भी,
मेरे हर शब्द में बस जाए कुछ-कुछ।
अगर तुझसे जुड़ा हर पल लिखूं,
तो ज़िन्दगी भी कम पड़ जाए।
तेरे नाम को हर सुबह कहूं,
तो सूरज भी देर से आए।
तेरे प्यार की ये जो धुन बजी,
अब ये रुक नहीं सकती कभी।
तू जब साथ हो, तो लगे जैसे,
ख़ुदा भी मुस्कुरा दे अभी।
तू है मेरा साज, मैं तेरी रागिनी,
तेरे बिना अधूरी मेरी ये कहानी।
हर जन्म में तेरा संग मिले,
बस यही दुआ है मेरी जुबा ।
तू है...
मैं हूँ...
प्यार है...
और ये साज कभी ना थमे...
लेखक
सुहेल अंसारी (सनम)
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