🏵️💫💫जब मिलूँ तुमको तो
ऐसे समेटना मुझको
जैसे कि पहली दफा हो
जैसे कि अब कभी न मिलेंगे
समेटना ऐसे कि दर्द निथर
जाएं मुझमें से
पीड़ाएं दम तोड़ दें मुझमें
और ध्वस्त हो जाएं
उदासियों की अनगिनत मीनारें
जब मिलूँ तुमको तो ऐसे
समेटना मुझको
जैसे कि सृष्टि समेटी जा रही हो
जैसे कि घर बचाया जा रहा हो
समेटना मुझको ऐसे कि
मैं रो पड़ूं बिलखकर
आंसू बहा ले जाएं एकाकीपन
और शेष रह जाए
मुझमें केवल तुम्हारा *प्रेम,*
जब मिलूँ तुमको तो ऐसे समेटना
मुझको