"पुरानी यादें"
कुछ यादें पुरानी किताबों जैसी होती हैं,
जिनके पन्ने खुलते ही वो महक लौट आती है।
वो हँसी, वो बातें, वो गलियाँ... सब वैसा का वैसा,
बस हम ही थोड़े बदल गए हैं — या फिर वक़्त ज़्यादा चल पड़ा।
वो छत पे बैठकर बेवजह बातें करना,
बिना टाइम देखे घंटों तक एक-दूसरे को पढ़ना।
वो कॉपी के आखिरी पन्नों पे नाम लिखना,
और फिर खुद ही काट देना — जैसे कुछ था ही नहीं।
पुरानी एल्बम में दबे कुछ फटे-से फोटो,
जिन्हें देख के आंखें हँसती हैं पर दिल भीग जाता है।
वो पहला गाना जो तूने भेजा था,
आज भी बजता है तो अंदर कुछ काँप जाता है।
कभी यूँ ही पुराना रास्ता पकड़ लेती हूं,
जहाँ से एक ज़माना गुजरता था हमारा।
हर मोड़ कुछ कहता है, हर पेड़ पहचानता है,
बस लोग नए हो गए हैं, और हम थोड़े चुप।
यादें — ना पूरी जाती हैं, ना मिटाई जाती हैं,
बस वक्त के साथ धीरे-धीरे अंदर बस जाती हैं।
जैसे दिल का वो कोना, जहाँ रोशनी कम पड़ती है,
पर सबसे गहरी चीज़ें वहीं होती हैं।
कुछ यादें बस इसलिए भी लौट आती हैं,
क्योंकि वो कभी गई ही नहीं होतीं।
वो दिल में ठहरी रहती हैं,
और हम… बस रोज़ थोड़ा और जी लेते हैं उन्हें।